दिल की गलियों में आया करपर सब को मत बतलाया करहर दिन मिलना ठीक नहीं हैदिल पागल है समझाया करसच भी तेरा झूट लगेगाइतनी क़समें मत खाया करआ कर इस दिल के गुलशन मेंफूल के जैसा खिल जाया करअच्छों की सोहबत में घुलकरतू भी अच्छा हो जाया करदिल की बात 'रज़ा' पढ़ लेगासब कुछ सच-सच बतलाया कर— SALIM RAZA REWA