साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होता
मेरे घर में ख़ुशियों का सिलसिला नहीं होता
राह पर सदाक़त की गर चला नहीं होता
सच हमेशा कहने का हौसला नहीं होता
रौनक़ें नहीं जातीं मेरे घर के आँगन से
दिल अगर नहीं बँटता घर बँटा नहीं होता
थोड़े ग़म ख़ुशी थोड़ी थोड़ी सिसकियाँ भी हैं
ज़िन्दगी से अब हमको कुछ गिला नहीं होता
कोशिशों से देता है रास्ता समुंदर भी
हौसला रहे क़ाएम फिर तो क्या नहीं होता
डूबती नहीं कश्ती पास आके साहिल के
बे-वफ़ा अगर मेरा ना-ख़ुदा नहीं होता
उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डाली
वो अगर नहीं होता कुछ 'रज़ा' नहीं होता
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