ख़ुद को हमारा कर रहे हैं आप क्यूँ
ख़ुद का ख़सारा कर रहे हैं आप क्यूँ
वो काम जो इक बार भी करना न था
वो ही दुबारा कर रहे हैं आप क्यूँ
जो भी है वो सब कुछ हमारा ही तो है
मेरा तुम्हारा कर रहे हैं आप क्यूँ
जिस पे रखोगे हाथ वो मिल जाएगा
हम से गुज़ारा कर रहे हैं आप क्यूँ
— Sarvjeet Singh















