वो जो मुझको कुछ पल अपना लगता है
क्यूँ वो कुछ पल बाद पराया लगता है
वो जो मेरे साथ बहुत सालों से है
वो अब और किसी का साया लगता है
वो बस मुझ सेे हँस के बातें करता है
और न जाने सबको क्या-क्या लगता है
उसके आगे मेरी क़ीमत ख़ास नहीं
उसको जो हो महँगा सस्ता लगता है
दिल की बातें दिल में रखना ठीक नहीं
कह कर देखो काफ़ी अच्छा लगता है
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