उन लम्हों को भूल न जाना
उन वादों को भूल न जाना
उन अपनों के आने पर फिर
इन अपनों को भूल न जाना
अपना काम निकल जाने पर
फिर रिश्तों को भूल न जाना
वो जो दुख में साथ खड़े थे
उन लोगों को भूल न जाना
मंज़िल के मिल जाने पर तुम
इन रस्तों को भूल न जाना
दो पल की ख़ुशियाँ मिलने पर
'सर्व' ग़मों को भूल न जाना
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