dil ke bahaalne kii tadbeer to hai | दिल के बहलाने की तदबीर तो है

  - Shakeel Badayuni

दिल के बहलाने की तदबीर तो है
तू नहीं है तिरी तस्वीर तो है

हम-सफ़र छोड़ गए मुझको तो क्या
साथ मेरे मिरी तक़दीर तो है

क़ैद से छूट के भी क्या पाया
आज भी पाँव में ज़ंजीर तो है

क्या मजाल उनकी न दें ख़त का जवाब
बात कुछ बाइस-ए-ताख़ीर तो है

पुर्सिश-ए-हाल को वो आ ही गए
कुछ भी हो 'इश्क़ में तासीर तो है

ग़म की दुनिया रहे आबाद 'शकील'
मुफ़्लिसी में कोई जागीर तो है

  - Shakeel Badayuni

More by Shakeel Badayuni

As you were reading Shayari by Shakeel Badayuni

Similar Writers

our suggestion based on Shakeel Badayuni

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari