rakkha zaruraton ke sabab be-dili se yaad | रक्खा ज़रूरतों के सबब बे-दिली से याद

  - Shakir Dehlvi

रक्खा ज़रूरतों के सबब बे-दिली से याद
करता है कौन हमको भला अब ख़ुशी से याद

इक बे-कली ने याद से ग़ाफ़िल किया तेरी
कुछ कल पड़ी तो करने लगे बे-कली से याद

करते हैं कुछ भी याद तो आता है याद वो
मंसूब हो गई है हमारी किसी से याद

दरिया-दिली पे मेरी वो हैरान रह गया
उसने रखा था मुझको मेरी तिश्नगी से याद

मुझको यक़ीन है मेरे जाने के बाद भी
मुझको रखेंगे आप मेरी शा'इरी से याद

  - Shakir Dehlvi

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