सर पकड़ कर ज़मीं पे बैठ गया
जो जहाँ था वहीं पे बैठ गया
सारे गुलशन को छोड़ कर भँवरा
इक लब-ए-नाज़नीं पे बैठ गया
कुछ सितारे ज़मीं पे रौशन थे
मैं भी जाकर वहीं पे बैठ गया
बल्लियों कूदता उछलता दिल
आपकी इक नहीं पे बैठ गया
इक कबूतर ख़याल का तेरे
उड़ के आया जबीं पे बैठ गया
मुफ़्त में दे दिया मकान-ए-दिल
जब भरोसा मकीं पे बैठ गया
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