सब समझते हैं कि इक बहता हुआ दरिया हूॅं मैं
ये फ़क़त मैं जानता हूॅं किस क़दर प्यासा हूॅं मैं
आज ख़ुद से बात की मैंने तो अंदाज़ा हुआ
इक दो कमियों के अलावा आदमी अच्छा हूॅं मैं
इक नई दुनिया बसा ली उसने मुझको छोड़ कर
जो ये कहता था कि उसके वास्ते दुनिया हूॅं मैं
दो घड़ी जब उस सेे मिलता हूॅं तो हो जाता हूॅं ख़ुश
बाद में उस सेे बिछड़ कर देर तक रोता हूॅं मैं
वक़्त दुनिया दोस्त दुश्मन राह मंज़िल हम सेफ़र
जाने किस किस से लड़ा हूॅं तब यहाँ पहुंचा हूॅं मैं
Read Full