किसी से अब कोई शिकवा नहीं है
हमारा वक़्त ही अच्छा नहीं है
फ़लक पर धुंध ही है या हमीं ने
अभी तक ग़ौर से देखा नहीं है
हमारी ज़िंदगी रफ़्तार में है
हमारे पास कुछ रुकता नहीं है
ये सूनी खिड़कियाँ अब बोलती हैं
कोई परदेस से लौटा नहीं है
कई सदमों से वाक़िफ़ हो चुका है
ग़नीमत है कि दिल बैठा नहीं है
ख़ुशी की बात है ख़ुश हैं हमारे
ख़ुशी की बात पर रोना नहीं है
— shampa andaliib















