आपसे कोई शिकायत अब नहीं है

ज़िंदगी से ही मोहब्बत अब नहीं है

अब नहीं हो आप मेरी दस्तरस में
आप को पाने की चाहत अब नहीं है

इस लिए दिखता नहीं रंग-ए-दुआ अब
पहले जैसे थी इबादत अब नहीं है

चारा-गर अब वक़्त मुझ पर ख़र्च मत कर
अब नहीं है मुझ को राहत अब नहीं है

आप अपना जाम अपने पास रखिए
पहले वाली मुझ को आदत अब नहीं है

आप ही की सम्त फिर भी चल रहे हैं
आप से मिलने की सूरत अब नहीं है

जान कर हैरान हैं हम आज ये सब
आप को हम से मोहब्बत अब नहीं है

दोस्त मेरे ख़ूब तू ने दोस्ती की
पहले थी तुझ से शिकायत अब नहीं है

— Sohil Barelvi

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