जब से ले कर गया तेरा साया
मैं कभी लौट ही नहीं पाया
मेरे दिल में तो आया मर जाऊँ
तेरे दिल में कभी नहीं आया
दुख से तर थे मेरे कई अशआर
जिन को इरशाद कर नहीं पाया
बात जो वक़्त पर कही जाती
बाद मुद्दत के होंट पर लाया
मुझ को उस का भी हो गया एहसास
जो सितम आपने नहीं ढाया
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