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Top 10 of
Khan Janbaz
SHER
मिन्नतें करता था रुक जाओ मेरा कोई नहीं
मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं
Khan Janbaz
10
SHER
अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है
Khan Janbaz
9
GHAZAL
मिन्नतें करता था रुक जाओ मिरा कोई नहीं
मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं
Khan Janbaz
8
GHAZAL
सय्याद बता तो सही इस जाल में क्या है
गर दिल नहीं मेरा तो तिरे बाल में क्या है
Khan Janbaz
7
GHAZAL
मैं शक्ल देख के कैसे कहूँ कि क्या होगा
हसीन शख़्स है मुमकिन है बे-वफ़ा होगा
Khan Janbaz
6
SHER
उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
Khan Janbaz
5
SHER
इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
4
SHER
इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के
Khan Janbaz
3
SHER
बच गया है जो तेरा थोड़ा सा हिस्सा मुझ में
अब तलक मुझ को किसी का नहीं होने देता
Khan Janbaz
2
GHAZAL
इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
1
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