sayyaad bataa to sahi is jaal men kya hai | सय्याद बता तो सही इस जाल में क्या है

  - Khan Janbaz

सय्याद बता तो सही इस जाल में क्या है
गर दिल नहीं मेरा तो तिरे बाल में क्या है

वैसे तो ख़ुद इस चाँद का क़ाइल हूँ मैं लेकिन
इक रौशनी को छोड़ कर इस थाल में क्या है

मजनूँ ही बता सकता है लैला की फ़ज़ीलत
या सोहनी से पूछ कि महिवाल में क्या है

मैं हश्र के मैदान में कह दूँगा मोहब्बत
पूछेगा ख़ुदा जब तिरे आ'माल में क्या है

जी करता है उन को तिरी तस्वीर दिखा दूँ
जो पूछते हैं मुझ से कि बंगाल में क्या है

अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है

  - Khan Janbaz

Religion Shayari

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