जाने क्या आप को मक़सूद है ऐसा कर के

मार देना किसी बीमार को अच्छा कर के

इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के

फिर ख़याल आएगा तुझ को किसी मजबूरी का
और फिर तू भी चला जाएगा तन्हा कर के

उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के

मेरे आने की ख़बर सुनके चला आया कोई
और कोई आज भी आया नहीं वा'दा कर के

— Khan Janbaz

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