निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ
किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
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हम एक रात हुए थे क़रीब और क़रीब
फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है
फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम
एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
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जुदाई में तिरी आँखों को झील करते हुए
सुबूत ज़ाएअ'' किया है दलील करते हुए
सुबूत ज़ाएअ'' किया है दलील करते हुए
मैं अपने आप से ख़ुश भी नहीं हूँ जाने क्यूँ
सो ख़ुश हूँ अपने ही रस्ते तवील करते हुए
न जाने याद उसे आया क्या अचानक ही
गले लगा लिया मुझ को ज़लील करते हुए
कहीं तिरी ही तरह हो गया न हो ये दिल
सो डर रहा हूँ अब उस को वकील करते हुए
थकन सफ़र की तो महसूस ही नहीं होती
चलूँ तुम्हें जो सर-ए-राह फ़ील करते हुए
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ग़म उठाने का हौसला भी नहीं
और इस के बिना मज़ा भी नहीं
और इस के बिना मज़ा भी नहीं
साथ तेरा अज़ाब है मुझ को
चाहिए कोई दूसरा भी नहीं
तुम भला क्यूँ उदास रहने लगे
तुम को तो यार इश्क़ था भी नहीं
इश्क़ की राह से गुज़रना पड़ा
और था कोई रास्ता भी नहीं
उन को दर-अस्ल दूर जाना था
मसअला इतना था बड़ा भी नहीं
ख़ुद समझ लो मिरे लिए क्या थे
आज से तुम को बद-दुआ' भी नहीं
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ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है
ये ज़रूरत भी तो मोहब्बत है
ये ज़रूरत भी तो मोहब्बत है
मेरा भी दिल नहीं था रुकने का
उस ने भी कह दिया इजाज़त है
शाइ'रों की नज़र से मत देखो
दुनिया दर-अस्ल ख़ूब-सूरत है
तुम मुझे छोड़ कर चले जाओ
मेरी क़ुर्बत अगर मुसीबत है
लौट आया मिरा अकेला-पन
अब किसी की कहाँ ज़रूरत है
'अक्स' बेहद नसीब वाले हो
तुम को मरने की भी सुहूलत है
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झूठ का बोलना आसान नहीं होता है
दिल तिरे बा'द परेशान नहीं होता है
दिल तिरे बा'द परेशान नहीं होता है
सब तिरे बा'द यही पूछते रहते हैं मुझे
अब किसी बात पे हैरान नहीं होता है
कैसे तुम भूल गए हो मुझे आसानी से इश्क़ में कुछ भी तो आसान नहीं होता है
हिज्र का ज़ाइक़ा लीजे ज़रा धीरे धीरे
सब की थाली में ये पकवान नहीं होता है
कोई किरदार मज़ा देता नहीं है उस का
जिस कहानी का तू उनवान नहीं होता है
होने को क्या नहीं होता है जहाँ में लेकिन
तुम से मिलने का ही इम्कान नहीं होता है
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Aks samastipuri
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