ग़म उठाने का हौसला भी नहीं
और इस के बिना मज़ा भी नहीं
साथ तेरा अज़ाब है मुझ को
चाहिए कोई दूसरा भी नहीं
तुम भला क्यूँ उदास रहने लगे
तुम को तो यार इश्क़ था भी नहीं
इश्क़ की राह से गुज़रना पड़ा
और था कोई रास्ता भी नहीं
उन को दर-अस्ल दूर जाना था
मसअला इतना था बड़ा भी नहीं
ख़ुद समझ लो मिरे लिए क्या थे
आज से तुम को बद-दुआ' भी नहीं
— Aks samastipuri















