ग़म उठाने का हौसला भी नहीं

और इस के बिना मज़ा भी नहीं

साथ तेरा अज़ाब है मुझ को
चाहिए कोई दूसरा भी नहीं

तुम भला क्यूँ उदास रहने लगे
तुम को तो यार इश्क़ था भी नहीं
इश्क़ की राह से गुज़रना पड़ा
और था कोई रास्ता भी नहीं

उन को दर-अस्ल दूर जाना था
मसअला इतना था बड़ा भी नहीं

ख़ुद समझ लो मिरे लिए क्या थे
आज से तुम को बद-दुआ' भी नहीं

— Aks samastipuri

More by Aks samastipuri

Other ghazal from the same pen

See all from Aks samastipuri →

Rahbar Shayari

Shers of rahbar.

All Rahbar Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling