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Top 10 of
Khalil Ur Rehman Qamar
SHER
एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी
लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
10
SHER
तेरे दिल के निकाले हम कहाँ भटके कहाँ पहुँचे
मगर भटके तो याद आया भटकना भी ज़रूरी था
Khalil Ur Rehman Qamar
9
SHER
मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू
मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो
Khalil Ur Rehman Qamar
8
SHER
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं
तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
7
NAZM
"मैं बिज़नेस-मैन हूँ जानम"
— Khalil Ur Rehman Qamar
6
NAZM
"याद है पहले रोज़ कहा था"
— Khalil Ur Rehman Qamar
5
GHAZAL
जैसे हर ज़ेहन को ज़ंजीर से डर लगता है
पीर-ओ-मुर्शद मुझे हर पीर से डर लगता है
Khalil Ur Rehman Qamar
4
GHAZAL
अश्क-ए-नादाँ से कहो बा'द में पछताएँगे
आप गिरकर मेरी आँखों से किधर जाएँगे
Khalil Ur Rehman Qamar
3
SHER
ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया
Khalil Ur Rehman Qamar
2
SHER
आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ
उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
1
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