ज़िन्दगी में इश्क़ का अधूरापन भी झूठा है
    मेहबूब के ना होने का सूनापन भी झूठा है

    गर जो हो जाता है भूले से भी दीदार उसका
    उसे देख लेने का उतावलापन भी झूठा है

    महफ़िल में भी खोए रहते हो उसकी यादों में
    यार की यादों का ये अकेलापन भी झूठा है

    मोहब्बत की खातिर कैसे पागल से फिरते हैं
    ये आशिकों के प्यार का आवारापन भी झूठा है

    कुछ मजबूरियां रहीं होंगी उसकी जो चला गया
    उससे नफ़रत करने का ये दिखावापन भी झूठा है

    कभी जो फुर्सत मिले तो ख़ुद से भी मिल लेना
    समझ जाओगे "निहार", ये दीवानापन भी झूठा है

    Shashank Tripathi
    0 Likes

    लबों पर हंसी है तो दिल में ये कैसी चुभन है
    अरे ये मोहब्बत भी दोस्तों इक अजीब फ़न है

    रूह से रूह का इश्क़ कहां मिलता है अब "निहार"
    आजकल जिस्मानी इश्क़ का ही दौर ए चलन है

    Shashank Tripathi
    1 Like

    अब जो हम हर बात पर मुस्कुराते हैं
    ना जाने कितना दर्द है जिसे छिपाते हैं

    कोई है इस कदर अजीज हमे कि मत पूछो
    और वही मेरे किरदार पर उंगलियां उठाते हैं

    जिन्हे अपना समझ बैठे थे वो हाल तक नहीं पूछते
    और कई बेगाने हैं जो अब भी साथ निभाते हैं

    कुछ पुराने लम्हें जो लबों पर मुस्कान लाते थे
    अब बार बार याद आकर हमे रुलाते हैं

    जिसकी खुशी की दुआ में उठते हैं हमारे हाथ
    वो नफ़रत की आग में क्यों ख़ुद को जलाते हैं

    हमे मालूम है मौजें सब कुछ बहा कर ले जाएंगी "निहार"
    फिर भी आशियां रेत का साहिल पर ही बनाते हैं

    Shashank Tripathi
    0 Likes

    ज़िन्दगी के सफ़र में ख़ुशी और ग़म का अपना अपना किस्सा है
    अच्छा नहीं तो बुरा ही सही, पर वो शख़्स मेरी कहानी का हिस्सा है

    Shashank Tripathi
    4 Likes

    इक रोज़ हमारे बिखरते रिश्ते का राज़ खोल दिया उसने
    इल्ज़ाम मुझपे डाल कर, जुदा होने को बोल दिया उसने

    उससे मोहब्बत इतनी कि खामोशी से सुनता रहा तोहमतें
    बड़ी बेरुखी से "निहार" मेरी मोहब्बत को तोल दिया उसने

    Shashank Tripathi
    0 Likes

    तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने
    दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने

    बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र
    मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने

    मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा
    तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने

    मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आंखों में चुभने लगे हैं
    तुम कोई नया ख्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने

    इंसां के घरों के दरवाजों ने परिंदो को बेघर कर दिया
    "निहार" हर रोज इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने

    Shashank Tripathi
    1 Like

    कभी नज़रों में तल्खी तो कभी इशारों की नज़ाकत
    काट दे तेरे इशारों को, कौन करेगा ऐसी हिमाकत

    Shashank Tripathi
    1 Like

    यूँ खामोश बैठे किस उलझन में हो
    इंकार है या इकरार है बता दो हमे

    मोहब्बत हमने की है तुमसे
    गर इश्क़ ख़ता है तो सज़ा दो हमे

    मरता नहीं इस जहां में कोई किसी के बगैर
    गर ज़िंदा हो तो इत्तिला दो हमे

    सुना है हमारे ख़तों को जला दिए तुमने
    गर जला सको तो जला दो हमे

    ये जो दुनिया इश्क़ के खिलाफ है, कहाँ है?
    ऐलान-ए-जंग करनी है , कोई पता दो हमे

    लड़ाई मुश्किल है तो क्या, हौसले बुलंद हैं
    बात आजमाइश की है तो आज़मा लो हमे

    Shashank Tripathi
    0 Likes

    मंज़िलें मिलती नहीं फ़क़त ख़्वाब देखने से
    पाँव के छाले गवाह है सफ़र-ए-मंज़िल के

    Shashank Tripathi
    2 Likes

    खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
    आसमान में उड़ने का ख्वाब है और पैरों तले जमीं है

    Shashank Tripathi
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers