तुम जो अब लौट आओ तो कुछ बात बने

दिल से दिल का हाल बताओ तो कुछ बात बने

बहुत तन्हा कट रहा है ये ज़िन्दगी का सफ़र
मेरे कदम से कदम मिलाओ तो कुछ बात बने

मेरे हिस्से में नहीं कुछ फकत अंधेरे के सिवा
तुम जो इक दिया जलाओ तो कुछ बात बने

मेरे ही ख़्वाबों के टुकड़े आँखों में चुभने लगे हैं
तुम कोई नया ख़्वाब दिखाओ तो कुछ बात बने

इंसां के घरों के दरवाज़ों ने परिंदों को बेघर कर दिया
"निहार" हर रोज़ इक पौधा लगाओ तो कुछ बात बने

— Shashank Tripathi

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