
लबों पर हँसी है तो दिल में ये कैसी चुभन है
अरे ये मोहब्बत भी दोस्तों इक अजीब फ़न है
रूह से रूह का इश्क़ कहाँ मिलता है अब "निहार"
आजकल जिस्मानी इश्क़ का ही दौर ए चलन है
— Shashank Tripathi
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