@shashank-tripathi
Shashank Tripathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shashank Tripathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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गर मैंने तुझसे बेतहाशा मोहब्बत ना की होती
तो दिल की सारी मुश्किलों को पल में हल कर देता
तेरी याद में यूं तड़पने से कहीं बेहतर तो ये होता
कि अपने दिल के जायदाद से तुझे बेदखल कर देता
यूं मेरे ख़्वाबों को हसीं बनाकर तुम क्या पाओगे
मुझसे नजदीकियां बढ़ाने की तुम सज़ा पाओगे
मैं बदनाम हूं किसी से मोहब्बत की खातिर "निहार"
मुझसे इश्क़ करके तुम फक़त दर्द-ए-वफ़ा पाओगे
लबों पर हंसी है तो दिल में ये कैसी चुभन है
अरे ये मोहब्बत भी दोस्तों इक अजीब फ़न है
रूह से रूह का इश्क़ कहां मिलता है अब "निहार"
आजकल जिस्मानी इश्क़ का ही दौर ए चलन है
ऐ ख़ुदा देख तेरे इंसान ने जहां का क्या हाल कर रखा है
परिंदो का घर उजाड़ कर उन्हे कफस में पाल कर रखा है
सुनो, गर जो तुम करना अब किसी से इश्क़
ख़्याल रहे कि उसे इश्क़ में कोई ग़म ना रहे
हमारा क्या है, ज़िंदा कल भी थे, आज भी हैं
ये अलग बात है कि अब पहले जैसे हम ना रहे
ज़िन्दगी के सफ़र में ख़ुशी और ग़म का अपना अपना किस्सा है
अच्छा नहीं तो बुरा ही सही, पर वो शख़्स मेरी कहानी का हिस्सा है
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुमसे मुँह मोड़ लेते हैं
थी झूठी सब क़समें, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुमसे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
इक रोज़ हमारे बिखरते रिश्ते का राज़ खोल दिया उसने
इल्ज़ाम मुझपे डाल कर, जुदा होने को बोल दिया उसने
उससे मोहब्बत इतनी कि खामोशी से सुनता रहा तोहमतें
बड़ी बेरुखी से "निहार" मेरी मोहब्बत को तोल दिया उसने
कभी नज़रों में तल्खी तो कभी इशारों की नज़ाकत
काट दे तेरे इशारों को, कौन करेगा ऐसी हिमाकत
दिल में अब दर्द को पालना मुश्किल हो रहा है
तुम्हें अल्फाजों में ढालना मुश्किल हो रहा है
मंज़िलें मिलती नहीं फ़क़त ख़्वाब देखने से
पाँव के छाले गवाह है सफ़र-ए-मंज़िल के
जो लबों से बयां ना हो सके उन्हें मैं कागज़ो पर लिखता हूं
शायद मैं वैसा बिल्कुल नहीं जैसा सभी को दिखता हूं
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
आसमान में उड़ने का ख्वाब है और पैरों तले जमीं है
चला हूं अब जो मैं बेफिक्र ज़माने से
देख शबनम भी शोलों से दहक जाते हैं
खुशियां इतनी बांटी थी बहार ए गुलजार में
कि मौसम ए खिज़ा में भी फूल महक जाते हैं
ता उम्र तेरे साथ चलने की ख्वाहिशें बुनता है
इक शख्स है जो तेरी खामोशियों को भी सुनता है
किस सम्त जाना है इश्क़ ए कश्ती को ये हवाएं बताएंगी
डूबें की पार कर जाएं आंखों के समंदर को, ये अदाएं बताएंगी
बस इतना ही सुन कर कलेजे को ठंडक पड़ जाती है
कि वो आज भी मेरे खातिर हर किसी से लड़ जाती है