Shashank Tripathi

Shashank Tripathi

@shashank-tripathi

Shashank Tripathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shashank Tripathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मेरा मन जो ख़यालों में कभी गुम हो उन ख़यालों का किरदार सिर्फ़ तुम हो — Shashank Tripathi
दिल में अब दर्द को पालना मुश्किल हो रहा है तुम्हें अल्फाजों में ढालना मुश्किल हो रहा है — Shashank Tripathi
जो लबों से बयाँ ना हो सके उन्हें मैं कागज़ो पर लिखता हूँ शायद मैं वैसा बिल्कुल नहीं जैसा सभी को दिखता हूँ — Shashank Tripathi
किस सम्त जाना है इश्क़ ए कश्ती को ये हवाएँ बताएंगी डूबें की पार कर जाएँ आँखों के समुंदर को, ये अदाएं बताएंगी — Shashank Tripathi
ऐ ख़ुदा देख तेरे इंसान ने जहाँ का क्या हाल कर रखा है परिंदों का घर उजाड़ कर उन्हे कफस में पाल कर रखा है — Shashank Tripathi
ज़िन्दगी के सफ़र में ख़ुशी और ग़म का अपना अपना क़िस्सा है अच्छा नहीं तो बुरा ही सही, पर वो शख़्स मेरी कहानी का हिस्सा है — Shashank Tripathi
कभी नज़रों में तल्ख़ी तो कभी इशारों की नज़ाकत काट दे तेरे इशारों को, कौन करेगा ऐसी हिमाकत — Shashank Tripathi
मंज़िलें मिलती नहीं फ़क़त ख़्वाब देखने से पाँव के छाले गवाह है सफ़र-ए-मंज़िल के — Shashank Tripathi
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है आसमान में उड़ने का ख़्वाब है और पैरों तले ज़मीं है — Shashank Tripathi
ता उम्र तेरे साथ चलने की ख़्वाहिशें बुनता है इक शख़्स है जो तेरी खामोशियों को भी सुनता है — Shashank Tripathi
बस इतना ही सुन कर कलेजे को ठंडक पड़ जाती है कि वो आज भी मेरे ख़ातिर हर किसी से लड़ जाती है — Shashank Tripathi

Ghazal

गर सारे उरूज़ ही जवाल होते तो सोचो क्या होता दिलों में फकत हसीं ख़याल होते तो सोचो क्या होता अँधेरा मिटाने को घरों से निकले हैं बस चंद रहनुमा सभी के हाथों में गर मशाल होते तो सोचो क्या होता बड़ी ख़ामोशी से सहते रहते हैं सियासत के ज़ुल्मो को आवाम के ज़बान पर भी सवाल होते तो सोचो क्या होता ज़ुल्म सहते रहने से तो कहीं बेहतर है मर जाना सभी के लहू में गर उबाल होते तो सोचो क्या होता जाती, मजहब, रंग, लिंग, और ना जाने क्या क्या हैं गर इन के नाम पर ना बवाल होते तो सोचो क्या होता खुशी-ओ-ग़म का मुकम्मल सफ़र है ज़िन्दगी "निहार" एक जैसे गर दोनों सूरत-ए-हाल होते तो सोचो क्या होता — Shashank Tripathi
यूँ मायूसी के सांचे में ना ख़ुद को ढालिए दोस्तों के साथ बैठ कर ग़मों को निकालिए खिले थे फूल कितने बाहर-ए-चमन में मगर जुनून-ए-इश्क़ में तो आपने काँटे उठा लिए अब जो यारों की महफ़िल है तो ज़ाम भी होंगे अभी अपने क़दमों को ज़रा बहकने से संभालिए कितने बेमुरव्वत होंगे वो लोग जो उस का नाम लेंगे अपनी बर्बादी के लिए अपना ही नाम उछालिए गर जो बाकी हो अभी भी उम्मीद-ए-वफ़ा कहीं मेरी मानिए तो जनाब आप इक कुत्ता पालिए नहीं मिलेगा सुकून इस मतलबी दुनिया से आप को अपनी ख़ुशियों को "निहार" अपने अंदर ही खंगालिए — Shashank Tripathi
तन्हा दिल, सर्द हवाएँ, और ये अलाव-ए-देहात आओ, बैठो "निहार" करें मोहब्बत की कुछ बात सुना है कि तुम्हें मोहब्बत पर ज़रा भी यक़ीन नहीं या कि मोहब्बत में किसी दिलनशीं से खाई है मात सफ़र ए ज़िन्दगी में इश्क़ के मायने अलग ही हैं तुम ही कुछ सुनाओ, बयान करो अपने हालात कि जब तक वो संग-दिल रही, दिल को सुकून रहा और उस का जाना हुआ, फिर हुई अश्कों की बरसात तुम अकेले नहीं हो, इश्क़ में सबका यही हाल है दिन तो गुज़र जाता है मगर कटती नहीं है ये रात हैं परेशान दर्द ए इश्क़ से सभी आशिक़ यहाँ मगर मालूम किसी को नहीं, कैसे मिलेगी दर्द से नजात — Shashank Tripathi
मेरी सांसें अब जो हिचकियों में कहीं अटक रहीं हैं कि निगाहें उसे देखने को अब दर दर भटक रहीं हैं उस की इक तस्वीर है जो मुझे चैन-ओ-सूकूं देती है उस के ज़ुल्फ़ों की लटें जिस में चेहरे पर लटक रहीं हैं जाते जाते वो मुझ सेे इस कदर लिपटी थी इक रोज़ कि उस की ख़ुशबू मेरे बदन से आज भी महक रही है कभी जो लगती थी प्यारी हद से ज़्यादा उसे मेरी वो तमाम बातें अब उस को खटक रहीं हैं गर वो ख़ुश है मुझ सेे दूर, उस की ख़ुशियाँ सिर आँखों पर मगर ये धड़कनें हैं जो बस उस के नाम से ही धड़क रहीं हैं सुना है हिचकियों में याद की तासीर होती है "निहार" मिलन की जो बेचैनियां हैं, वो ग़ज़लों में झलक रहीं हैं — Shashank Tripathi
मुझे पलकों पर मत बिठाओ नज़र से अब उतर जाने दो मैं ख़ुद ही समेट लूंगा ख़ुद को मुझे टूट कर बिखर जाने दो मंज़िल के ख़्वाब देखता हुआ रास्ता भटक गया हूँ कहीं मैं कल फिर सफ़र पर निकलूंगा, अब मुझे घर जाने दो वा'दा किया था उस ने मिलेगी अब दुल्हन के पोशाक में बातें मुलाक़ातें भी होंगी पहले उसे सज संवर जाने दो सुना है अब उस के दिल में किसी और का आशियाँ है ख़ैर कोई बात नहीं मुझे इस हादसे से भी गुज़र जाने दो उठ रहीं हैं बेचैनियों की लहरें उस की रुख्सती से "निहार" उस सेे इक मुलाक़ात करने मुझे अब उस के शहर जाने दो मुझे शिकायत नहीं कुछ किसी से बस इक ख्वाइश ज़िंदा है उसे आँख भर के देख लूँ इक बार फिर चाहे मुझे मर जाने दो — Shashank Tripathi