
सुनो, गर जो तुम करना अब किसी से इश्क़
ख़याल रहे कि उसे इश्क़ में कोई ग़म ना रहे
हमारा क्या है, ज़िंदा कल भी थे, आज भी हैं
ये अलग बात है कि अब पहले जैसे हम ना रहे
— Shashank Tripathi
Other sher from the same pen
Shers of khyaal.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling