ab jo ham har baat par muskuraate hainna jaane kitna dard hai jise chhipaate hain | अब जो हम हर बात पर मुस्कुराते हैं

  - Shashank Tripathi

अब जो हम हर बात पर मुस्कुराते हैं
ना जाने कितना दर्द है जिसे छिपाते हैं

कोई है इस कदर अजीज हमें कि मत पूछो
और वही मेरे किरदार पर उंगलियां उठाते हैं

जिन्हे अपना समझ बैठे थे वो हाल तक नहीं पूछते
और कई बेगाने हैं जो अब भी साथ निभाते हैं

कुछ पुराने लम्हें जो लबों पर मुस्कान लाते थे
अब बार बार याद आकर हमें रुलाते हैं

जिसकी ख़ुशी की दुआ में उठते हैं हमारे हाथ
वो नफ़रत की आग में क्यूँ ख़ुद को जलाते हैं

हमें मालूम है मौजें सब कुछ बहा कर ले जाएंगी "निहार"
फिर भी आशियां रेत का साहिल पर ही बनाते हैं

  - Shashank Tripathi

Aag Shayari

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