कैसे मुमकिन था तुझे दिल से भुलाए जाते
हक़ यही था कि तेरे नाज़ उठाए जाते
हक़ यही था कि तेरे नाज़ उठाए जाते
ज़िन्दगी रास्ता देती नहीं आसानी से
हम-सफ़र यूँ ही नहीं दोस्त बनाए जाते
तेरी ख़ातिर तो हम अपनों से भी लड़ बैठे थे
ख़्वाब दीवार से कैसे न लगाए जाते
देखते हम भी कि किस किस की तलब है दुनिया
जितने क़ैदी थे सभी सामने लाए जाते
आज़माना ही तुझे होता अगर मेरी जान
रास्ता दे के मसाइल न बताए जाते
पहले हम रूह की दीवार गिराते और फिर
राह में तेरी कई जाल बिछाए जाते
फ़ासला रखते मगर इतना कि साँस आती रहे
तेरी क़ुर्बत में कई फूल खिलाए जाते
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हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले
फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले
फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले
जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया
जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले
वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था
यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले
अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है
अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले
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सुकून तुम से मेरा इत्मीनान तुम से है
हसीन शख़्स मेरा कुल जहान तुम से है
हसीन शख़्स मेरा कुल जहान तुम से है
तुम्हारा लम्स मुझे बेशुमार करता है
मेरी निग़ाह है तुम से उड़ान तुम से है
मैं राज़-ए-इश्क़ बयाँ कर नहीं सकी अब तक
यही ख़बर है ज़मान-ओ-मकान तुम से है
कहीं मैं होश जो खो दूँ तो सामने आना
बिखर के देखा है मेरा धियान तुम से है
जो तुम नहीं तो करें किस पे बात हम 'तजदीद'
कि अपनी ख़ामुशी अपना बयान तुम से है
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उस को ज़िदस तो अच्छा नहीं रोकना छोड़ दो
उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो
उस की मर्ज़ी है तुम उस पे ये फ़ैसला छोड़ दो
मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो
तुम मिलोगे नहीं तो मैं जीते जी मर जाऊँगी
बा-ख़ुदा ऐसी ख़ुशफ़हमियाँ पालना छोड़ दो
मेरी आँखों पे पट्टी बँधी है बँधी रहने दो
उस के बारे में तुम भी बुरा सोचना छोड़ दो
गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
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