हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए
इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो जाए
इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो जाए
हम जिसे पास बिठा लें वो बिछड़ जाता है
तुम जिसे हाथ लगा दो वो तुम्हारा हो जाए
तुम को लगता है कि तुम जीत गए हो मुझ से
है यही बात तो फिर खेल दुबारा हो जाए
है मोहब्बत भी अजब तर्ज़-ए-तिजारत कि यहाँ
हर दुकाँ-दार ये चाहे कि ख़सारा हो जाए
10
92 Likes
इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है
यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है
यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है
इश्क़ है इश्क़ कोई खेल नहीं बच्चों का
वो चला जाए जिसे मात से डर लगता है
मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता
रोज़ बँटती हुई ख़ैरात से डर लगता है
हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी
अब बदलते हुए हालात से डर लगता है
दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर'
घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है
Read Fullवो चला जाए जिसे मात से डर लगता है
मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता
रोज़ बँटती हुई ख़ैरात से डर लगता है
हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी
अब बदलते हुए हालात से डर लगता है
दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर'
घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है
9
15 Likes
8
21 Likes
ज़मीं बनाई गई आसमाँ बनाया गया
बराए-इश्क़ ये सारा जहाँ बनाया गया
बराए-इश्क़ ये सारा जहाँ बनाया गया
तुम्हारी ना को ही आख़िर में हाँ बनाया गया
यक़ीं के चाक पे रख कर गुमाँ बनाया गया
तुम उस के पास हो जिस को तुम्हारी चाह न थी
कहाँ पे प्यास थी दरिया कहाँ बनाया गया
हमारे साथ कोई दो क़दम भी चल न सका
किसी के वास्ते इक कारवाँ बनाया गया
बदल के देख लो तुम जिस्म चाहे औरों से
वहीं पे ठीक है जिस को जहाँ बनाया गया
किसी को जब भी ज़रूरत पड़ी सियाही की
हमारा जिस्म जला कर धुआँ बनाया गया
बस एक मैं ही था बस्ती में बोलने वाला
तो सब से पहले मुझे बे-ज़बाँ बनाया गया
6
9 Likes
तुम्हारे काम अगर आए मुस्कुराने में
तो कोई हर्ज नहीं मेरे टूट जाने में
तो कोई हर्ज नहीं मेरे टूट जाने में
फ़रोख़्त हो गई हर शय जो दिल मकान में थी
मैं इतना ख़र्च हुआ हूँ उसे कमाने में
मैं अपनी जान से जाऊँगा है ये सच लेकिन
उसे भी ज़ख़्म तो आएँगे आज़माने में
वो एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत न बिन सका मुझ से
हज़ार बार मिटा हूँ जिसे बनाने में
तुम्हें तो सिर्फ़ ख़बर है चराग़ जलने की
हमारे हाथ जले हैं उसे जलाने में
तुम्हारे वस्ल की मस्ती थी और मय-ख़ाना
शराब ले के गया था शराब-ख़ाने में
इमारतों में मोहब्बत का देवता है वो
हमारे हाथ कटे हैं जिसे बनाने में
5
8 Likes
किसी ने हाल जो पूछा कभी मोहब्बत से
लिपट के रोया बहुत देर उस से शिद्दत से
लिपट के रोया बहुत देर उस से शिद्दत से
हमारा साथ जो छूटा तो इस में हैरत क्या
हमारे हाथ तो छूटे हुए थे मुद्दत से
ये और बात कि बीनाई जा चुकी मेरी
तुम्हारे ख़्वाब रखे हैं मगर हिफ़ाज़त से
जब उस ने भीड़ में मुझ को गले लगाया था
हर एक आँख मुझे तक रही थी हैरत से
ये कारोबार-ए-सियासत बहुत ही अच्छा है
बस आप झूट को बेचो बड़ी सदाक़त से
4
4 Likes
बना हुआ था कहीं आब-दान काग़ज़ पर
थी इतनी प्यास कि रख दी ज़बान काग़ज़ पर
थी इतनी प्यास कि रख दी ज़बान काग़ज़ पर
किराएदार की आँखों में आ गए आँसू
बनाए बैठे थे बच्चे मकान काग़ज़ पर
तुम्हारे ख़त में नज़र आई इतनी ख़ामोशी
कि मुझ को रखने पड़े अपने कान काग़ज़ पर
तमाम उम्र गुज़ारी है धूप में शायद
बना रहा है कोई साएबान काग़ज़ पर
उठा लिया है क़लम अब तो मैं ने भी 'यासिर'
उतार डालूँगा सारी थकान काग़ज़ पर
3
10 Likes
मिरी चीख़ों से कमरा भर गया था
कोई कल रात मुझ में मर गया था
कोई कल रात मुझ में मर गया था
बहुत मुश्किल है उस का लौट आना
वो पूरी बात कब सुन कर गया था
मुझे पहचानता भी है कोई अब
मैं बस ये देखने ही घर गया था
ज़माना जिस को दरिया कह रहा है
हमारी आँख से बह कर गया था
कई सदियों से सूखा पड़ रहा है
यहाँ इक शख़्स प्यासा मर गया था
हमारा बोझ था सर पर हमारे
तुम्हारे साथ तो नौकर गया था
ये मत समझा ख़ता किस से हुई थी
बता इल्ज़ाम किस के सर गया था
2
7 Likes
आँखों को कुछ ख़्वाब दिखा कर मानेंगे
आप हमारे होश उड़ा कर मानेंगे
आप हमारे होश उड़ा कर मानेंगे
लगता है ये पानी बेचने वाले लोग
हर बस्ती में आग लगा कर मानेंगे
तुझ को छूने की चाहत में दीवाने
शायद अपने हाथ जला कर मानेंगे
तय तो ये था पिछली बातें भूलनी हैं
आप मगर सब याद दिला कर मानेंगे
घर का झगड़ा गर बाहर आ जाएगा
बाहर वाले अंदर आ कर मानेंगे
चाहे फिर आवाज़ चली जाए लेकिन
हम उस को आवाज़ लगा कर मानेंगे
घर पक्का करने की बातें करते हैं
या'नी वो दीवार उठा कर मानेंगे
1
13 Likes










