Zafar Zaidi

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@zafar-zaidi

Zafar Zaidi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zafar Zaidi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Nazm
हमारी दस्तरस में क्या है क्या नहीं
ज़मीं नहीं
ख़ला नहीं
कि आसमाँ नहीं
हमें तो सिर्फ़ सोचना ये चाहिए
कि मुट्ठियाँ खुली रहें
हथेलियों से उँगलियाँ जुड़ी रहें
ज़मीं से पाँव
पाँव से क़दम
क़दम से रास्तों का सिलसिला बना रहे
हमें तो सिर्फ़ देखना ये चाहिए
कि जिस को लोग रद्द करें
और अपनी दीद की ग़लीज़ चादरों से ढाँप कर शिकायतों से बाँध दें
हमारे जिस्म मावरा हों उस ग़िलाफ़ से
हमारी दस्तरस में क्या है क्या नहीं
बस यही तो शर्त है
हमारे जिस्म अन-गिनत रहें
मगर हमारे सर जुड़े रहें
रगों में प्यार का लहू रवाँ रहे बदन बदन जवाँ रहे
ज़मीं रहे ख़ला रहे न आसमाँ रहे
मगर हमें यही गुमाँ रहे
हमारी दस्तरस में क्या नहीं
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