banaakar naak usne zulm dhaaya hai | बनाकर नाक उसने ज़ुल्म ढाया है

  - 100rav

बनाकर नाक उसने ज़ुल्म ढाया है
मेरा हो सकता था वो जो पराया है

मिलेगी उस सेे अच्छी माँ ये कहती है
ख़ुदा तू ही बता दे क्या बनाया है

बिना उसके मेरी हालत हुई ऐसी
किसी ने सौ में से नब्बे घटाया है

किराया वक़्त पे दे देता हूँ फिर भी
वो मालिक पूछता है क्या किराया है

मेरा रोना बदल देता अगर इनको
न कहते इक नया रिश्ता भी आया है

  - 100rav

Maa Shayari

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