मुझ सेे मिलने का ये एहसान आख़िरी तो नहींये मुलाक़ात मेरी जान आख़िरी तो नहींजाने वाले तू चला जा मगर ये बतला दूँइस ज़माने में तू इंसान आख़िरी तो नहीं— Aqib khan