मेरा कमरा तेरी ख़ुश्बू से महक जाता है
ज़िक्र तेरा मेरी साँसों को यूँँ महकाता है
तेरी यादों से इसे बहला लिया करता हूँ
शब-ए-फुरक़त में कभी दिल मेरा घबराता है
अपने माज़ी के बयाबाँ में मुझे दूर तलक
तेरी यादों का हिरण ख़ूब ही दौड़ाता है
तेरे दीदार की जब प्यास सताती है मुझे
दिल के सहरा में तेरा अक्स नज़र आता है
पर्दा चिलमन का उड़ाती हैं हवाएँ जब अनीस
ऐसा लगता है कि आँचल तेरा लहराता है
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