उसका हर झूठ सनद है, हद है
मेरी सच बात भी रद है, हद है
इक ही शाइर वो अदद है, हद है
जैसे ग़ालिब है असद है, हद है
ऐसी करता वो मदद है, हद है
छोटा करता मेरा क़द है, हद है
भूख से लोग गँवाते हैं जान
और सड़ती ये रसद है, हद है
क़त्ल-ओ-ग़ारत ये तशद्दुद, नफ़रत
सब उसे लगता सुखद है, हद है
मुँह पे ता'रीफ़ के पुल है उसके
दिल में दरिया-ए-हसद है, हद है
ज़ुल्म तेरा कि 'अनीस' अपना ज़ब्त
सब कहो साथ कि हद है, हद है
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