याद तेरी चराग़ों सी जलती रही
रात भर शम्अ सी मैं पिघलती रही
दिल में तूफ़ान जज़्बात का यूँँ उठा
मौज सागर में जैसे मचलती रही
वस्ल की आरज़ू यूँँ बदन में चुभी सज पर करवटें मैं बदलती रही
आँखों से नींद के सब परिंदे उड़े
मैं इधर से उधर ही टहलती रही
बह रही प्यार की एक मुझ में नदी
प्यार की आग में फिर भी जलती रही
रहगुज़र में लगी है बहुत ठोकरें
मैं गिरी और गिर कर सँभलती रही
बस तसव्वुर किया था 'अनीस' आप का
सामने देख कर आँख मलती रही
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Anis shah anis
our suggestion based on Anis shah anis
As you were reading Charagh Shayari Shayari