dard men aur ye museebat bhi | दर्द में और ये मुसीबत भी

  - Arohi Tripathi

दर्द में और ये मुसीबत भी
जान पर आ गई मोहब्बत भी

कौन हूँ मैं सवाल करता है
अब नहीं है तिरी ज़रूरत भी
'इश्क़ क्या एक दिन कि होती है
देख ली 'इश्क़ की हक़ीक़त भी

क्या से क्या हो गए तिरी ख़ातिर
क्यूँ नहीं आ रही क़यामत भी

छोड़ अब दूरियाँ बनाते हैं
रोकता है हमें शरीयत भी

टूट जाए अगर भरोसा तो
काम आती नहीं नसीहत भी

पूछते हो कि हाल कैसा है
ठीक लगती नहीं तबीयत भी

यार मोमिन हमें बताओ तो
'इश्क़ राहत भी दे अज़ियत भी

  - Arohi Tripathi

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