एक तो हम से शायरी न हुई
और ये भी कि ख़ुदकुशी न हुई
'इश्क़ में ख़ाक हो गए हम तो
लोग कहते हैं आशिक़ी न हुई
एक ख़्वाहिश थी आख़िरी मेरी
वो मुकम्मल भी आख़िरी न हुई
क़ब्र पे आप मेरी आ जाना
आप की ग़ैर-हाज़िरी न हुई
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