हम को लगता था आप आऍंगे
या हमें ही वहाँ बुलाऍंगे
एक खिड़की का फ़्रेम ख़ाली है
घर को क्या ख़ाक हम सजाऍंगे
ईद के दिन भी तुम नहीं आए
ईद क्या ख़ैर से मनाऍंगे
वादे पे तू खरा नहीं उतरा
वा'दा हम तो मगर निभाएँगे
तू हमें छोड़ कर चला जाए
छोड़कर दुनिया हम भी जाऍंगे
कहती हो मर गए तो मर जाओ
देखना मर के हम दिखाऍंगे
— Arohi Tripathi















