sawaal ke javaab ka tha intizaar | सवाल के जवाब का था इंतिज़ार

  - "Dharam" Barot

सवाल के जवाब का था इंतिज़ार
रखा था मुस्कुराके क़िस्सा बरक़रार

हाँ भी नहीं कहा न भी नहीं कहा
किसी ने ऐसे छीना था मेरा क़रार

दिए थे तोड़ एक से ज़ियादा दिल
कहा था तब ये बेवफ़ा का रोज़गार

गया है पहले भी कोई मुझे यूँँ छोड़
नया नहीं है कुछ हो जा तू भी फ़रार

किया था शोर दर्द को छलक ने दो
किसी ने भी सुनी नहीं मेरी पुकार

की बंदगी धरम ख़ुदा समझ के और
वो कह रहा है मुझ पे भूत है सवार

  - "Dharam" Barot

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