zamaana baat karta hai nayi har din | ज़माना बात करता है नई हर दिन

  - "Dharam" Barot

ज़माना बात करता है नई हर दिन
सो उस पर सोचना भी क्या सही हर दिन

चले जाते हो हर दिन देख कर मुझको
बताओ साथ रहना है कभी हर दिन

की थी तारीफ़ झूठी और ऐसे ही
मुसीबत इक गले आकर पड़ी हर दिन

किया मिलके डिसाइड रुक गया रिश्ता
मगर वो याद आती है घड़ी हर दिन

निकलना पड़ता है उस दर्दस आगे
मगर रहनी है आँखों में नमी हर दिन

  - "Dharam" Barot

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