mausam suhaana aaya baarish ka yahii aasaar hai | मौसम सुहाना आया बारिश का यही आसार है

  - "Dharam" Barot

मौसम सुहाना आया बारिश का यही आसार है
सुर से भरा जो सुन रहे हो राग वो मल्हार है

उस आख़िरी उम्मीद का भी टूट जाना हार क्या
बस इक सफ़र है ज़िंदगी क्या जीत है क्या हार है

कुछ छूट जाता है तो कुछ मिल जाता है तू छोड़ सब
चल चलते हैं हम घूमने तू आने को तैयार है

तू दोस्त अच्छा है मगर यूँँ ख़्वाब में मत आया कर
मैंने भी उस सेे पूछा क्या ये 'इश्क़ का इज़हार है

है बात तो तेरी सही पर बाद इसके दोस्त क्या
सच में हमारे बीच में रह पाएगा जो प्यार है

इक सोच मुझ पर भारी हो सकती है माना ये मगर
क्या है ग़लत क्या है सही ये जानता फ़नकार है

  - "Dharam" Barot

Mahatma Gandhi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by "Dharam" Barot

As you were reading Shayari by "Dharam" Barot

Similar Writers

our suggestion based on "Dharam" Barot

Similar Moods

As you were reading Mahatma Gandhi Shayari Shayari