vo chhoti 'umr men aañsu chhupata tha | वो छोटी 'उम्र में आँसू छुपाता था

  - "Dharam" Barot

वो छोटी 'उम्र में आँसू छुपाता था
मरा था बाप बचपन में कमाता था

सभी को याद कर लेना बुरा हो वक़्त
रखें दिल में उसे जो काम आता था

छुपाकर दर्द सारा शख़्स इक देखो
बड़े ही प्यार से सबको हँसाता था

तरीक़ा जानती थी वो मनाने का
सताने का सलीक़ा मुझको भाता था

कोई भी रिश्ते में बंधे न थे फिर भी
न जाने कौन सा दोनों का नाता था

रखा था भार मैं का 'उम्र भर तक साथ
धरम वो शख़्स भी कंधे पे जाता था

  - "Dharam" Barot

Gham Shayari

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