'ishq men aabaad karna qaai | 'इश्क़ में आबाद करना क़ैदी को आज़ाद करना

  - "Dharam" Barot

'इश्क़ में आबाद करना क़ैदी को आज़ाद करना
तुम ग़ुलामों को जहाँ से इस क़दर ही बाद करना

था बुरा पर काम अच्छे कर गया था कह के ऐसा
मेरे जाने बाद मुझको थोड़ा सा पर याद करना

ऐसा लगता है कि उसको याद करने का ये मतलब
चूर कर ख़ुद को नशे में ख़ुद को ही बर्बाद करना

सब नशों से दूर रहकर रात दिन शिद्दत से हमको
यार भोले नाथ का हम सबको ही है नाद करना

सोच कर कितना ज़ियादा शे'र इक हमने लिखा था
उसपे भी तुमको ये कहना यार इसको बाद करना

  - "Dharam" Barot

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