haare huoon ko hausla dena bhi to ik farz hai | हारे हुओं को हौसला देना भी तो इक फ़र्ज़ है

  - "Dharam" Barot

हारे हुओं को हौसला देना भी तो इक फ़र्ज़ है
जीते हुओं पर हारने वालों का रहता कर्ज़ है

देकर अदालत में चुनौती झूठी बच जाते हो तुम
उसकी अदालत में मगर हर इक शिकायत दर्ज़ है

जब बात ख़ुद पर आती ख़ुद के ही नियम हम मानते
यानी की हम इंसान का ख़ुदगर्ज होना मर्ज़ है

हाँ वक़्त लग जाता है घर को घर बनाने में धरम
रख पाना घर को घर ये उस सेे भी बड़ा इक फ़र्ज़ है

  - "Dharam" Barot

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