यही है वास्ता बारिश का अश्कों से मेरे यार
कभी तो आते है जरमर कभी तो मूसलाधार
हमारे शौक़ में शामिल उसे भी अच्छी लगती
हमें सो चाहिए इक कार बढ़िया सी वो भी थार
नहीं लगना है अच्छा कोई भी तेरे अलावा
तेरे जैसा कभी कर पाएगा मुझ सेे कोई प्यार
नया है दिन सलीक़ा भी नया सो आप भी अब
पुरानी रंजिशे सब छोड़ कर हो जाओ तैयार
ख़ुशी को देख चेहरे पर ये अंदाज़ा लगाए
ज़ियादा ही हुआ है ग़म से इस बंदे को जी प्यार
कपल में कॉफी पीने का मज़ा कुछ और था पर
ज़ियादा था मज़ा जब चाय पर थे यार हम चार
पड़े थे लड़ने में हम दल में जब इक दूसरे से
ये मौक़ा' देख पहना तीसरे ने जीत का हार
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