क्या मुजरिम बेल पे बाहर आने कम हुए हैं
और तुम कहते हो बिकने वाले कम हुए हैं
हाँ माना पार लगाने वाले कम हुए हैं
कुछ अपनी पर भी आने वाले कम हुए हैं
क्या ख़ुद-कुशी की बढ़ती दर के पीछे दुख है
या पल में फ़ोन उठाने वाले कम हुए हैं
आना जाना स्कूटी से जब से उस का
तब से कितने ये रिक्शे वाले कम हुए हैं
उस ने पूछा था क्या तुम ने ख़ाना खाया
अब देर से ख़ाना खाने वाले कम हुए हैं
दिल को पत्थर करने वाले मिल जाएँगे
बस पत्थर को धड़काने वाले कम हुए हैं
— Divya 'Kumar Sahab'















