kaun de awaaz usko ab yahaañ | कौन दे आवाज़ उसको अब यहाँ

  - Lalit Mohan Joshi

कौन दे आवाज़ उसको अब यहाँ
बोलता ही जब नहीं हो अब यहाँ

ग़ैर के वो जब गले से लग गया
मात उसकी जैसे तो हो अब यहाँ

घर के दरवाज़े सभी कर बंद अब
शोर लगता यार फिर हो अब यहाँ

आँखें करके बंद बैठा पीर इक
जैसे करता याद रब को अब यहाँ

आँखें उसकी याद में फूटीं मगर
भा गया दुश्मन उसे तो अब यहाँ

मैं भटकता ख़ोज में जिसकी यहाँ
दूर ख़ुद से पाया उसको अब यहाँ

मैं समंदर के किनारे आ गया
ख़ुद-कुशी शायद 'ललित' हो अब यहाँ

  - Lalit Mohan Joshi

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