kya bataayein dil men ab kya rah gaya hai | क्या बताऍं दिल में अब क्या रह गया है

  - Lalit Mohan Joshi

क्या बताऍं दिल में अब क्या रह गया है
दर्द अब तो 'उम्र भर का रह गया है

रंग चेहरे से उड़े सारे के सारे
बस फ़क़त इक दाग़ दिखता रह गया है

ज़िंदगी से है नहीं जब राब्ता कोई
किसलिए फिर दिल लगा सा रह गया है

उसने पूछा फ़ोन में फिर हाल ऐसे
सुनके सबकुछ सोचता सा रह गया है

है ललित को काम बस भाता रहा अब
दिल लगाकर काम करता रह गया है

  - Lalit Mohan Joshi

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