नोच नोच कर तो अपना भाई खाएगा
रूखी सूखी हड्डियाँ कसाई खाएगा
आधा आधा बाँट ले ये क्या ज़रूरी है
लाठी जिस की है वही तिहाई खाएगा
ख़ुश हुआ वो थूक के बताशे देख कर
सोचता था आज तो मिठाई खाएगा
घोड़े पर मैं हूँ सवार चाल चल के देख
इक क़दम बढ़ाएगा तो ढाई खाएगा
एक बार इश्क़ जिस को हो गया अज़ीज़
उम्र भर वो दर्द की दवाई खाएगा
— Amaan mirza















