गुज़रेगी साथ में ब ख़ुदा इत्मीनान रख
हाँ मैं बनूँगा सिर्फ़ तेरा इत्मीनान रख
आशिक़ मिज़ाज हूँ ज़रा सा और मुग़ल भी हूँ
लेकिन दिल अपना तुझ को दिया इत्मीनान रख
कर के दिखाऊँगा तुझे दुल्हन बनाऊँगा
फ़िलहाल मुझ पे तू ज़रा सा इत्मीनान रख
यूँ तो बहुत हैं लड़कियाँ फ़ेहरिस्त में मगर
तुझ को ही सब से आगे रखा इत्मीनान रख
लौट आएगा अज़ीज़ यक़ीनन वो भी कभी
आख़िर में जो ये कह गया था इत्मीनान रख
— Amaan mirza















