मुझे भी इस क़दर तुझ सेे मोहब्बत हैके जितनी दरिया से मछली को उल्फ़त हैकिसी ने मुझ से पूछा के वफ़ा क्या हैवफ़ा ईमानदारी की ज़मानत है— Amaan mirza