kar doon sab tujhpe kharch itni daulat nahin hai | कर दूँ सब तुझपे ख़र्च इतनी दौलत नहीं है

  - Amaan mirza

कर दूँ सब तुझपे ख़र्च इतनी दौलत नहीं है
बे फ़िज़ूली की मुझको भी आदत नहीं है

अब किसी को भी मुझ सेे मुहब्बत नहीं है
अब मुझे भी किसी से शिकायत नहीं है

अब किसी पर नहीं कर सकेंगे भरोसा
दिल धड़कता है लेकिन सलामत नहीं है

कटघरे में खड़े हैं वो सर को उठा कर
जिनको अपने किए पर नदामत नहीं है

बात हक़ की कहें गर तो बाग़ी हैं हम लोग
आप दंगे करें तो बग़ावत नहीं है

बाक़ी सब कुछ मेरे पास है उसके जितना
लेकिन उसके बराबर जहालत नहीं है

थी गई गुज़री जो बेच कर खा गए आप
आपकी आँखों में कोई ग़ैरत नहीं है

मेरे दिल पर है उसकी हुकूमत मगर अब
उसके दिल पर मेरी बादशाहत नहीं है

हम चले जाएँगे दूर नज़रों से तेरी
तू बस इक बार कह दे मुहब्बत नहीं है

मिल गया है मुझे मौत का सारा सामान
अब किसी चीज़ की मुझको हाजत नहीं है

  - Amaan mirza

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