दाग़-ए-सुवैदा दिल पे ब-रंग-ए-दिगर है आज
ये इश्क़ का नहीं है तो किस का असर है आज
मुश्ताक़ है तमाशा-ए-रक़्स-ए-शरर की बज़्म
ख़ुश हूँ कि चश्म-ए-नाज़ की मुझ पर नज़र है आज
है महशर-ए-ख़याल में अफ़सून-ए-इज़्तिराब
हर क़तरा मेरे इश्क़ का मिस्ल-ए-गुहर है आज
— Nirmal Nadeem















